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शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

नए रूप में दिखेगी दियारा की खेती

कृषि विभाग ने दियारा क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देने के लिए दियारा विकास परियोजना तैयार की है। इसके तहत भागलपुर जिले को 33 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। इसमें से 11 लाख 14 हजार 41 रुपए की राशि भागलपुर जिले को उपलब्ध करा दी गई है। जिले के पीरपैंती, कहलगांव, नाथनगर, बिहपुर, गोपालपुर, रंगरा, सबौर इस्माइलपुर प्रखंड के दियारा क्षेत्रों (गंगा के तटीय इलाकों में) मिला कुल आठ प्रखंडों में इस योजना को लागू किया जाएगा।
क्या है दियारा विकास परियोजना
दियारा का अधिकांश हिस्सा बाढ़ में डूब जाता है। जब जमीन पानी से बाहर आती है तो बिना अधिक मेहनत के किसानों को इससे अच्छी उपज प्राप्त हो जाती है। अगस्त से लेकर जनवरी तक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों का चयन किया जाएगा और उन्हें सब्जी, दलहन की खेती, मछली पालन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों को जिलास्तर के अलावा राज्यस्तर पर भी प्रशिक्षित किया जाएगा। लौकी, खीरा, परवल, तरबूज, खरबूज, करैला, झींगा, नेनुआ, सहजन, बोरा, शकरकन्द, तीसी, मिश्रीकंद, मसूर, गर्मा मूंग, मटर की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिला कृषि पदाधिकारी दिनेश प्रसाद सिंह ने बताया कि दियारा विकास योजना के तहत किसानों के बीच बीज वितरण, पौधा वितरण, कृषकों को राज्य के अंदर व बाहर भ्रमण एवं प्रशिक्षण का आयोजन कर उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि किया जाना है। इसके अतिरिक्त बॉयो जैविक, एवं बॉयो रसायान का वितरण, मिनी किट वितरण आदि कार्यक्रमों के साथ- साथ जैविक सत्यापन, बेबीकॉर्न का बाजार व्यवस्था के साथ उत्पादन प्रमुख है। साथ ही किसानों को सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए उनके लिए बांस बोरिंग की व्यवस्था की जाएगी। दियारा विकास परियोजना के तहत चयनित किसानों को बेबीकॉर्न की खेती की जानकारी दी जाएगी। बेबीकॉर्न यानी शिशु मक्का के बीज व जैविक उपादान उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों द्वारा उपजाए गए बेबीकॉर्न की खरीद की व्यवस्था सरकार द्वारा फल-सब्जी विकास निगम के माध्यम से की जाएगी। बेबीकॉर्न हर मौसम में उपजाया जा सकता है। एक एकड़ में मात्र 2400 रुपए का खर्च आता है। इसकी जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। बेबीकॉर्न का उपयोग लजीज व्यंजन बनाने, सलाद के रूप में काफी लोकप्रिय है।